Gravitation · NCERT / JEE / NEET · Class 11

उपग्रह की वृत्ताकार कक्षा: चाल, आवर्तकाल और ऊँचाई

पृथ्वी से 400 km पर उपग्रह की चाल, आवर्तकाल और ऊँचाई का संबंध इंटरैक्टिव प्रयोग से समझें।

उपग्रह नीचे क्यों नहीं गिरता?

उपग्रह लगातार पृथ्वी की ओर गुरुत्वीय त्वरण अनुभव करता है, लेकिन उसके पास पार्श्व दिशा में पर्याप्त चाल होती है। इसलिए उसका पथ पृथ्वी की वक्रता के साथ मुड़ता रहता है। कक्षा में गुरुत्व शून्य नहीं होता; वही अभिकेंद्रीय बल प्रदान करता है।

वृत्ताकार कक्षा का सूत्र

उपग्रह का द्रव्यमान m, पृथ्वी का द्रव्यमान Mₑ, पृथ्वी की त्रिज्या Rₑ और सतह से ऊँचाई h लें। केंद्र से दूरी r = Rₑ + h होगी। गुरुत्व और आवश्यक अभिकेंद्रीय बल बराबर रखने से m कट जाता है।

GMₑm/r² = mv²/r
r = Rₑ + h
v = √(μ/r) ; μ = GMₑ
T = 2π√(r³/μ)

ध्यान दें: सूत्र में r पृथ्वी के केंद्र से दूरी है, सिर्फ सतह से ऊँचाई h नहीं। यह आदर्श वृत्ताकार कक्षा के लिए है।

हल किया हुआ उदाहरण: 400 km की ऊँचाई

पृथ्वी की औसत त्रिज्या 6,371 km तथा μ ≈ 3.9860 × 10¹⁴ m³/s² लें। h = 400 km होने पर r = 6,771 km होगा। इससे v ≈ 7.673 km/s तथा T ≈ 92.4 मिनट मिलता है। ये किसी विशेष वास्तविक उपग्रह के प्रत्यक्ष आँकड़े नहीं बल्कि आदर्श गणना हैं।

अधिक ऊँचाई पर क्या होगा?

v ∝ r⁻½
T ∝ r³ᐟ²
T² ∝ r³

वृत्ताकार कक्षा बड़ी होने पर उपग्रह की चाल कम होती है, किंतु परिक्रमा का रास्ता लंबा हो जाता है। इसलिए आवर्तकाल बढ़ता है। यही एक केंद्रीय पिंड के चारों ओर केप्लर के तीसरे नियम का संबंध है।

कक्षीय ऊर्जा

K = GMₑm/(2r)
U = −GMₑm/r
E = −GMₑm/(2r)

ऊँची स्थिर वृत्ताकार कक्षा में अंतिम चाल कम होने के बावजूद कुल कक्षीय ऊर्जा अधिक (कम ऋणात्मक) होती है। स्थितिज और गतिज दोनों ऊर्जाओं को साथ देखना जरूरी है।

निर्देशित प्रयोग

  1. वृत्ताकार कक्षा अन्वेषक खोलें और ऊँचाई 400 km रखें।
  2. चाल लगभग 7.67 km/s और आवर्तकाल लगभग 92.4 मिनट से तुलना करें।
  3. ऊँचाई बढ़ाएँ और पहले चाल तथा T के परिवर्तन की भविष्यवाणी करें।
  4. r³ और T² के संबंध को अपनी तालिका में लिखें।
  5. ध्यान रखें कि चित्र स्पष्टता के लिए योजनाबद्ध है, वास्तविक पैमाने पर नहीं।

मॉडल की सीमाएँ

वायु प्रतिरोध, पृथ्वी का चपटा आकार, चंद्रमा-सूर्य के गुरुत्वीय प्रभाव और अंतरिक्ष यान के इंजन का बल शामिल नहीं हैं। वास्तविक भूस्थिर उपग्रह के लिए केवल ऊँचाई नहीं बल्कि कक्षा का तल, दिशा और पृथ्वी के घूर्णन से संबंध भी महत्वपूर्ण हैं।

गलत धारणाएँ और समाधान

  • उपग्रह पर गुरुत्व बना रहता है।
  • आदर्श कक्षा की चाल छोटे उपग्रह के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती।
  • अधिक ऊँचाई का अर्थ अधिक वृत्ताकार चाल नहीं है।
  • r और h को कभी समान न रखें।

परीक्षा अभ्यास

  1. r चार गुना हो तो v? उत्तर: आधा।
  2. r चार गुना हो तो T? उत्तर: आठ गुना।
  3. अभिकेंद्रीय बल कहाँ से आता है? उत्तर: पृथ्वी का गुरुत्व।
  4. h = 400 km हो तो क्या r = 400 km लेंगे? उत्तर: नहीं, पृथ्वी की त्रिज्या जोड़ेंगे।

आगे क्या करें?

नीचे दिए मुफ्त लैब और कार्यपत्रक से भौतिक सूत्रों की जाँच करें। प्रश्न हल करते समय पहले कक्षा की त्रिज्या को SI इकाई में बदलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कक्षा में गुरुत्व शून्य होता है?

नहीं। गुरुत्व अभिकेंद्रीय त्वरण देता है।

ऊँची वृत्ताकार कक्षा में चाल कम क्यों है?

क्योंकि v = √(μ/r) में r बढ़ने पर v घटता है।

क्या ऊँचाई और कक्षीय त्रिज्या एक हैं?

नहीं; r = Rₑ + h।

ऊँची कक्षा का आवर्तकाल अधिक क्यों है?

रास्ता लंबा और वृत्ताकार चाल कम होती है।

आगे पढ़ें और संदर्भ

संदर्भ स्वतंत्र अध्ययन के लिए हैं; इस पृष्ठ की व्याख्या और उदाहरण NANDAX के लिए तैयार किए गए हैं।